About Shree Kanchan Das Ji Maharaj

कंचनधाम में फैली है शांति, सुंदरता, भक्ति और दिव्यता, वर्ष 1997 में वे भारत भ्रमण करते हुए वंृदावन के गोवर्धनजीधाम पहुंचे। वर्ष-2003 में वे गोवर्धन पीठ के पीठाधीश्वर बने। वर्ष 2008 में वे भ्रमण करते हुए बूंदी जिले में पहुंचे। फौलाई की तरफ से गुजरते वक्त उनकी नजर एक जगह पड़ी, यह जगह उन्हें पवित्र लगी। यहां उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंग बनाना तय किया। महाराज ने शिष्यों काे देवभूमि गेंडोली के पास द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थापित करने का आदेश दिया। उन्हाेंने वर्ष 2007 में गैंडोली के पास कंचनधाम बनाना शुरू कराया था। सुबह-शाम पूजा, रोज सुबह भगवान शिव का श्रंगार व शाम को महाआरती होती है। यह जगह भगवान श्रीकृष्ण के गुरु गर्ग महाराज की तपोभूमि मानी जाती है।

यहां हो जाते हैं देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन गेंडोली के पास 27 बीघा में बने कंचनधाम में द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं। ज्योतिर्लिंगों की अंदर की परिधि 400 और बाहरी परिधि एक किमी है। ज्योतिर्लिंगों का निर्माण ग्रेनाइट व विशेष शिलाओं से हुआ है, जो हिमाचल, बिहार, राजस्थान, गुजरात और नेपाल से लाई गई7 चैन्नई के महाबलीपुरम में शिलाओं को ज्योतिर्लिंगों रूप दिया गया। देश के अलग-अलग कोनों के ज्योतिर्लिंगों का नाप-स्वरूप एक जैसा और वैसी ही प्रतिकृति है। ज्योतिर्लिंग गोलाकार में स्थापित हैं, बीचोंबीच सरोवर है, मध्य शिव परिवार विराजित है। श्रीकंचनधाम सेवा संस्था ट्रस्ट इसे संचालित करता है,। प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की सेवा के लिए अलग पंडित हैं।

इन 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतीक है यहां
गुजरात-सौराष्ट्र के सोमनाथ, औरंगाबाद-महाराष्ट्र के घुश्मेश्वर, त्रयंबकेश्वर, भीमशंकर, उत्तराखंड के केदारनाथ, काशी के विश्वनाथ, तमिलनाडु के रामेश्वरम, द्वारिकापुरी के नागेश्वर, संथाल-बिहार के वैद्यनाथ, मालवा के ओंकारेश्वर व उज्जैन के महाकालेश्वर, श्रीशैल आंध्रप्रदेश के मल्लिकार्जुन।

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हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार, एक दिव्य शिवलोक है , दिव्य कैलाश है जहां ओंकार रूप परमात्मा परम शिव प्रति दिन निवास करते हैं।

दिव्य शिवलोक, दिव्य कैलाश अवम, परम शिव भी पृथ्वी के कई पवित्र स्थानों में एक अनुकरणीय भिन्नता है। हम मानते हैं कि राजस्थान के बूंदी जिले में, श्री कंचन धाम दिव्य शिवलोक एक रूप है, जहाँ भगवान शिव, भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग रूप में स्थित हैं।

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